मुंबई, 29 नवम्बर, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। बीते एक सप्ताह के दौरान देश के सर्राफा बाजारों में सोने-चांदी के भाव में तेज़ी से उछाल दर्ज किया गया। इस बढ़त ने न सिर्फ निवेशकों का ध्यान फिर से गोल्ड-सिल्वर की ओर खींचा है, बल्कि यह संकेत भी दिया है कि वर्ष 2025 के अंत तक बुलियन मार्केट में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 21 नवंबर को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,23,146 के आसपास मिल रहा था। एक सप्ताह में इसकी कीमत में ₹3,445 की बढ़त दर्ज की गई और 28 नवंबर तक यह ₹1,26,591 पर पहुँच गया। इस साल पहले भी सोना रिकॉर्ड स्तरों को छू चुका है—17 अक्टूबर को इसकी कीमत ₹1,30,874 प्रति 10 ग्राम तक पहुंची थी, जो अब तक की सबसे ऊंची दर है।
चांदी भी पीछे नहीं रही। 21 नवंबर को एक किलोग्राम चांदी की कीमत ₹1,51,129 थी, जो बढ़कर 28 नवंबर को ₹1,64,359 प्रति किलो तक जा पहुंची। यानी सिर्फ एक हफ्ते में ₹13,230 की तेजी। साल के दौरान भी चांदी ने कई रिकॉर्ड बनाए—14 अक्टूबर को यह ₹1,78,100 प्रति किलो तक पहुंच चुकी है, जो वर्ष की उच्चतम कीमत है।
साल की शुरुआत से अब तक सोना और चांदी दोनों में भारी तेजी देखी गई है। 31 दिसंबर 2024 को सोना ₹76,162 प्रति 10 ग्राम था, जबकि आज यह ₹1,26,591 तक पहुँच गया है। यानी साल भर में सोने ने ₹50,429 की बढ़त दर्ज की। वहीं चांदी 86,017 रुपए प्रति किलो से बढ़कर अब 1,64,359 रुपए तक जा चुकी है—यानी ₹78,342 की जबरदस्त तेजी।
जानकारों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में डॉलर इंडेक्स में गिरावट, भू-राजनीतिक तनाव, और ब्याज दरों में संभावित नरमी जैसे कारकों ने निवेशकों को सेफ-हेवन यानी सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोना-चांदी की ओर रुख करने पर मजबूर किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमती धातुओं में लगातार तेजी देखने को मिल रही है, जिससे घरेलू बाजार के भाव पर सीधा असर पड़ रहा है।
सोना खरीदते समय ध्यान देने योग्य बातें -
सोना खरीदते समय उपभोक्ताओं को कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर नज़र रखनी चाहिए। सबसे पहले, हमेशा हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। BIS हॉलमार्किंग यह निर्धारित करती है कि सोना कितने कैरेट का है और उसकी शुद्धता कितनी विश्वसनीय है। दूसरा, सोना खरीदने से पहले उसके भाव को कई स्रोतों—जैसे मान्यताप्राप्त एसोसिएशनों या प्रतिष्ठित ज्वेलर्स—से अवश्य मिलान करें। 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के दाम अलग-अलग होते हैं, इसलिए शुद्धता के अनुसार कीमत की तुलना करना ज़रूरी है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अनिश्चितता बनी रहती है तो सोना और चांदी आने वाले महीनों में और महंगे हो सकते हैं। त्योहारी और शादी के मौसम में मांग बढ़ने से दाम और भी ऊपर जाने की संभावना है।
सोना-चांदी की कीमतों का तुलनात्मक सारणी (21 से 28 नवंबर 2025) -
| तारीख |
सोना (₹ प्रति 10 ग्राम, 24K) |
साप्ताहिक अंतर |
चांदी (₹ प्रति किलो) |
साप्ताहिक अंतर |
| 21 नवंबर 2025 |
1,23,146 |
– |
1,51,129 |
– |
| 28 नवंबर 2025 |
1,26,591 |
+3,445 |
1,64,359 |
+13,230 |
| 31 दिसंबर 2024 (तुलना हेतु) |
76,162 |
वर्षभर में +50,429 |
86,017 |
वर्षभर में +78,342 |
विशेषध्यान देने योग्य बातें:
- सोना खरीदते समय हमेशा प्रमाणित (हॉलमार्क-युक्त) 24/22/18 कैरेट का सोना चुनें, ताकि शुद्धता सुनिश्चित हो।
- रोजाना या खुद खरीदने के दिन के भाव को IBJA या भरोसेमंद सोर्सेज से क्रॉस-चेक करें — शहर और purity के अनुसार दाम बदल सकते हैं।
- वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुमान के मुताबिक भारतीय घरों और मंदिरों में 24,000 से 25,000 टन सोना मौजूद है। इसकी कीमत 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 88 लाख करोड़ रुपए) है।
- चीन के बाद भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा बाजार है। हालांकि, हमारे यहां सोने का उत्पादन 0.5% से भी कम होता है। लेकिन, डिमांड कुल वैश्विक मांग की 25% से भी ज्यादा है।
- भारत में हर साल 800 टन सोने की खपत भारत में हर साल 700-800 टन सोने की खपत होती है जिसमें से 1 टन का उत्पादन भारत में ही होता है और बाकी आयात किया जाता है।
- भारत में सोने की 50% से ज्यादा मांग शादियों पर निर्भर करती है। देश में हर साल औसतन 1 करोड़ शादियां होती हैं। अगर औसत निकालें तो एक दुल्हन के लिए 200 ग्राम तक की ज्वेलरी खरीदी जाती है।
- सोना एक 'नोबेल' धातु है, यानी इसमें न ही जंग लगती और न ही इसकी चमक कम होती है। अन्य 'नोबेल' धातुओं में रूथेनियम, रोडियम, पैलेडियम, चांदी, तांबा, प्लैटिनम शामिल हैं।