बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की खबरें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। साल 2026 की शुरुआत में ढाका से लगभग 150 किलोमीटर दूर एक गांव में हुई घटना ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान बांग्लादेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों की ओर खींचा है। हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास पर हुआ यह जानलेवा हमला न केवल व्यक्तिगत क्रूरता है, बल्कि वहां रह रहे अल्पसंख्यकों के मन में गहरे डर का प्रतीक भी है।
हमले की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तां
खोकन चंद्र दास अपने गांव में एक छोटी सी दवा की दुकान और मोबाइल बैंकिंग का व्यवसाय चलाते थे। बुधवार की शाम जब वे हमेशा की तरह दुकान बंद कर अपने घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। हमलावरों ने न केवल धारदार हथियारों से उन पर वार किया, बल्कि उन्हें जिंदा जलाने की भी कोशिश की।
खोकन दास की पत्नी सीमा दास के अनुसार, हमलावरों ने उनके पति के सिर और चेहरे पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। जलती हुई अवस्था में खोकन दास ने अदम्य साहस दिखाया और पास के एक तालाब में कूद गए, जिससे आग बुझ गई और उनकी जान बच सकी। वर्तमान में वे ढाका मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
"हमारा किसी से कोई विवाद नहीं था"
अस्पताल के बाहर बिलखती सीमा दास ने बताया कि उनके परिवार का कभी किसी से कोई झगड़ा नहीं रहा। उन्होंने रोते हुए कहा, "मेरे पति ने दो हमलावरों को पहचान लिया था, शायद इसीलिए उन्हें मारने की इतनी वीभत्स कोशिश की गई। हम हिंदू हैं और बस शांति से जीना चाहते हैं।" सीमा के अनुसार, हमलावर स्थानीय कट्टरपंथी थे और उन्होंने जानबूझकर धार्मिक आधार पर उनके परिवार को निशाना बनाया।
खोकन दास के तीन छोटे बच्चे हैं, जिनमें से एक अपने पिता के लिए खून के इंतजाम में लगा है। डॉक्टरों के अनुसार, खोकन का काफी खून बह चुका है और उन्हें बचाने के लिए कम से कम छह यूनिट रक्त की तत्काल आवश्यकता है।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते हमले
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की बाढ़ सी आ गई है।
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धार्मिक निशाना: मंदिरों में तोड़फोड़, घरों को जलाना और व्यापारियों को निशाना बनाना एक भयावह पैटर्न बन गया है।
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पहचान का संकट: कट्टरपंथी तत्वों द्वारा हिंदुओं को निशाना बनाकर देश छोड़ने पर मजबूर करने की खबरें लगातार आ रही हैं।
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कानूनी निष्क्रियता: पीड़ित परिवारों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।
भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
भारत सरकार ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जारी इस "लगातार हिंसा" पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह ढाका में अंतरिम सरकार के संपर्क में है और वहां के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार को चेतावनी दी है कि यदि हिंसा नहीं रुकी, तो देश में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
हालांकि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार बार-बार यह दावा कर रही है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन खोकन चंद्र दास जैसे मामले इन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।
निष्कर्ष
खोकन चंद्र दास पर हुआ हमला बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे का एक और उदाहरण है। यह केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि एक शांतिपूर्ण समाज के बिखरने की चेतावनी है। जब तक दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलती, तब तक वहां के अल्पसंख्यक समुदायों में सुरक्षा की भावना बहाल होना मुश्किल है।