﻿<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?><rss version="2.0"><channel><title>Firozabad Vocals</title><link>https://firozabadvocals.com/</link><description>News Helpline is a India based entertainment news agency which provides the latest showbiz stories, Photos, Videos and features to print, online and broadcast media.</description><copyright>Copyright 2017 newshelpline.com. All rights reserved.</copyright><item><title>Reliance Annual Report%3A रिलायंस की चेतावनी- FY27 में वोलाटाइल रहेगा तेल बाजार; गैस और ग्रीन केमिकल्स से बढ़ेगा मुनाफा!</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/_upload_additional_251256_652135702570211.jpg</Image><description>&lt;p&gt;रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (&lt;strong&gt;RIL&lt;/strong&gt;) ने अपनी वित्त वर्ष 2025-26 (&lt;strong&gt;FY26&lt;/strong&gt;) की सालाना रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट में कंपनी ने आने वाले समय को लेकर निवेशकों और बाजार को आगाह किया है. रिलायंस के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 (&lt;strong&gt;FY27&lt;/strong&gt;) में ग्लोबल तेल बाजार (Global Oil Market) में भारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता देखने को मिल सकती है. वैश्विक स्तर पर चल रही आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियां इस सेक्टर के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं.&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;इन 3 बड़े कारणों से बाजार में बनी रहेगी अस्थिरता&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;रिलायंस ने अपनी रिपोर्ट में उन मुख्य वजहों को रेखांकित किया है, जो आने वाले महीनों में वैश्विक और घरेलू ऊर्जा बाजार को सबसे ज्यादा प्रभावित करेंगी:&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कच्चे तेल की ऊंची कीमतें:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल (Crude Oil) के दामों में लगातार बनी हुई तेजी रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल मार्जिन पर दबाव डाल सकती है.&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;वैश्विक आर्थिक सुस्ती:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक रफ्तार धीमी होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर ईंधन और ऊर्जा की मांग प्रभावित हो सकती है.&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;मिडिल ईस्ट (Middle East) और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों पर जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई चेन में कभी भी रुकावट आने का जोखिम बना हुआ है.&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;

&lt;hr /&gt;
&lt;h3&gt;भविष्य के बिजनेस मॉडल पर रिलायंस को पूरा भरोसा&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;इन तमाम वैश्विक चुनौतियों और तेल बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने भविष्य के कोर बिजनेस को लेकर काफी सकारात्मक रुख दिखाया है. कंपनी ने भरोसा जताया है कि पारंपरिक ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस में दबाव के बावजूद उसके नए एनर्जी वर्टिकल्स मुनाफे को संतुलित रखेंगे:&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;प्राकृतिक गैस (Natural Gas):&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की मजबूत मांग और बेहतर प्राइसिंग से कंपनी के रेवेन्यू को सहारा मिलेगा.&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ग्रीन केमिकल्स और एनर्जी ट्रांजिशन:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;रिलायंस का मानना है कि क्लीन एनर्जी, रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स और ग्रीन केमिकल्स से जुड़े नए कारोबारी कदम आने वाले वर्षों में कंपनी के मुनाफे को एक नई और टिकाऊ मजबूती देंगे.&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;p&gt;रिलायंस का यह रुख साफ दिखाता है कि कंपनी पारंपरिक फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) से हटकर तेजी से खुद को भविष्य के ग्रीन एनर्जी पावरहाउस के रूप में ढाल रही है, ताकि वैश्विक उतार-चढ़ाव का असर उसके बिजनेस पर कम से कम पड़े.&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//reliance-annual-report/62849</link><pubDate>5/29/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>कॉर्पोरेट गवर्नेंस की अनूठी मिसाल%3A रिलायंस के रिकॉर्ड मुनाफे के बाद भी मुकेश अंबानी ने लगातार छठे साल नहीं लिया कोई वेतन</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/_upload_additional_251238_18204428-16750801.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मुंबई:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी की एक असाधारण मिसाल कायम करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने लगातार छठे वर्ष भी कंपनी से किसी भी प्रकार का पारिश्रमिक या वेतन नहीं लेने का फैसला किया है। रिलायंस समूह द्वारा जारी की गई नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट (Annual Report 2026) के अनुसार, श्री अंबानी ने वित्त वर्ष 2020-21 से लेकर हाल ही में समाप्त हुए वित्त वर्ष 2025-26 तक कंपनी से कोई वेतन, भत्ता, अनुलाभ, सेवानिवृत्ति लाभ, कमीशन या स्टॉक ऑप्शंस (शेयर विकल्प) स्वीकार नहीं किया है। गौरतलब है कि उन्होंने जून 2020 में देश में फैले कोविड-19 महामारी के संकट के दौरान समाज और अर्थव्यवस्था को संबल देने के लिए स्वेच्छा से अपनी पूरी सैलरी छोड़ने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था, जिसे उन्होंने अब तक पूरी दृढ़ता से जारी रखा है।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;मुकेश अंबानी का यह फैसला इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि इसी वित्तीय वर्ष के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने व्यावसायिक इतिहास का सबसे बड़ा समेकित शुद्ध लाभ (Consolidated Net Profit) दर्ज किया है, जो 95,754 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही, वर्ष के अंत में रिलायंस का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) भी बढ़कर 18,19,103 करोड़ रुपये (लगभग 191.8 अरब डॉलर) दर्ज किया गया। वैश्विक महामारी से पूर्व भी श्री अंबानी ने वर्ष 2008-09 से अपने सालाना वेतन को स्वेच्छा से केवल 15 करोड़ रुपये पर सीमित रखा था और लगातार 12 वर्षों तक इस सीमा में कोई बदलाव नहीं किया था। खेल और व्यावसायिक विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व द्वारा व्यक्तिगत लाभ से ऊपर कंपनी और देश के हितों को वरीयता देने की यह अनूठी प्रतिबद्धता शेयरधारकों और वैश्विक निवेशकों के बीच रिलायंस के प्रति भरोसे को और अधिक मजबूत करती है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//corperate-ambani/62847</link><pubDate>5/29/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>भारतीय तकनीकी बाजार में नया धमाका%3A फ्रांसीसी डिजिटल दिग्गज &amp;#39;इनेटम&amp;#39; ने &amp;#39;आयोनोस&amp;#39; के साथ मिलकर लॉन्च किया &amp;#39;इनेटम इंडिया&amp;#39;, एआई-संचालित विकास को मिलेगी रफ्तार</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/jio5500791.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली/सेंट-ओएन (फ्रांस):&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;वैश्विक आईटी और डिजिटल सेवा क्षेत्र में एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए यूरोप की अग्रणी टेक कंपनी 'इनेटम' (Inetum) ने भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी 'आयोनोस' (Aionos) के साथ एक अभूतपूर्व हाथ मिलाया है। दोनों टेक दिग्गजों ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर 'इनेटम इंडिया' के गठन की घोषणा की, जो वैश्विक स्तर पर अत्याधुनिक एआई तकनीकों और समाधानों को वितरित करने के लिए एक मुख्य केंद्र (डिलीवरी इंजन) के रूप में काम करेगा। इस रणनीतिक गठजोड़ का प्राथमिक उद्देश्य भारत में मौजूद दुनिया की सर्वश्रेष्ठ तकनीकी प्रतिभाओं और एआई इंजीनियरों के कौशल का लाभ उठाना है, ताकि वैश्विक बाजारों में इनेटम के विस्तार को एक नया और शक्तिशाली इंजन मिल सके।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;इस विशेष साझेदारी के तहत, इनेटम इंडिया मुख्य रूप से यूरोमेड क्षेत्र (जैसे फ्रांस और बेल्जियम) के साथ-साथ बुल्गारिया, पोलैंड और यूनाइटेड किंगडम (यूके) जैसे तेजी से बढ़ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंपनी की कार्य क्षमताओं को मजबूती प्रदान करेगा। यह नया बिजनेस मॉडल इस तरह तैयार किया गया है कि जैसे-जैसे इनेटम वैश्विक स्तर पर नए और बड़े अनुबंध हासिल करेगा, भारत स्थित यह नई इकाई उतनी ही तेजी से अपनी परिचालन क्षमता का विस्तार करेगी। इस ऐतिहासिक शुरुआत पर इनेटम के अध्यक्ष एवं सीईओ जैकस पोम्मेरॉड ने कहा कि इनेटम इंडिया केवल एक ऑफशोर सेंटर नहीं है, बल्कि यह हमारे भविष्य के विकास की रीढ़ है, जो ग्राहकों को पारंपरिक मॉडलों की तुलना में कहीं अधिक तेज और सटीक एआई समाधान देगा। वहीं, आयोनोस के सह-संस्थापक और उपाध्यक्ष सी.पी. गुरनानी ने खुशी जताते हुए कहा कि यह साझेदारी आयोनोस के मूल विजन को साकार करती है, जिसमें हमारी पूरी एआई-नेटिव क्षमता, टेक्नोलॉजी स्टैक और आईपी (IP) का उपयोग करके एक ऐसा भविष्य-तैयार वैश्विक हब बनाया जा रहा है जो गति और शुद्धता की नई मिसाल पेश करेगा।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//Bhartiya-technical-market-mein-naya-dhamaka--French-digital-diggaj-‘Inetum’-ne-‘IONOS’-ke-saath-milkar-launch-kiya-‘Inetum-India’ -AI-powered-development-ko-milegi-raftaar/62830</link><pubDate>5/28/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>भारत-कनाडा आर्थिक संबंधों को नई रफ़्तार%3A टोरंटो में पीयूष गोयल ने कनाडाई निवेशकों संग की गोलमेज बैठक, 2030 तक $50 अरब डॉलर के व्यापार का साझा लक्ष्य</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/india-toronto8020641.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;टोरंटो/नई दिल्ली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत और कनाडा के बीच रणनीतिक निवेश और द्विपक्षीय व्यापार को एक नए मुकाम पर ले जाने के उद्देश्य से केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की कनाडा यात्रा का दूसरा दिन बेहद सफल रहा। टोरंटो के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित 'भारत-कनाडा संबंध-सेतु निर्माण' कार्यक्रम में श्री गोयल ने 150 से अधिक वैश्विक नीति निर्माताओं और उद्योगपतियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ एक और उच्च स्तरीय अनौपचारिक बैठक की, जिसमें दोनों देशों ने साल 2030 तक आपसी द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने और इस वर्ष के अंत तक 'व्यापार आर्थिक सहयोग समझौता' (CEPA) वार्ताओं को अंतिम रूप देने के अपने साझा संकल्प को दोहराया।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने भारत के विशाल बाजार और मजबूत आर्थिक सुधारों की सराहना करते हुए आगामी नवंबर में एक उच्च स्तरीय 'टीम-कनाडा व्यापार मिशन' को भारत भेजने की आधिकारिक घोषणा की। यह मिशन मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशेगा। इसके बाद दोनों मंत्रियों की सह-अध्यक्षता में 'कनाडा-भारत निवेश गोलमेज सम्मेलन' का आयोजन हुआ, जिसमें कनाडा के बड़े पेंशन फंड्स, प्रमुख बैंकों और वित्तीय संस्थानों के संस्थागत निवेशकों ने हिस्सा लिया। पीयूष गोयल ने कनाडाई कंपनियों को भारत के पारदर्शी नियामक वातावरण, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और देश में तेजी से उभरते ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। अपनी इस व्यस्त यात्रा के बीच, वाणिज्य मंत्री ने हंबर बे पार्क स्थित कनिष्क स्मारक का भी दौरा किया और एयर इंडिया 182 आतंकी हमले के पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दिन का समापन ब्रैम्पटन में भारतीय प्रवासी समुदाय के एक भव्य स्वागत समारोह के साथ हुआ, जहां श्री गोयल ने दोनों देशों के आर्थिक गलियारे को मजबूत करने में अप्रवासी भारतीयों की भूमिका को सराहा।&lt;/p&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//bharat-canada-aarthik-sambandhon-ko-nayi-raftaar-toronto-mein-piyush-goyal-ne-canadian-investors-ke/62829</link><pubDate>5/28/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>मुद्रा विनिमय पर अरविंद पनगढ़िया का बड़ा बयान%3A रिजर्व बैंक को सलाह, 100 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से न डरें और रुपये को बाजार के अनुसार गिरने दें</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/rbi4126901.jpg</Image><description>&lt;br /&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नयी दिल्ली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को देश की मौद्रिक नीति को लेकर एक बेहद बेबाक और महत्वपूर्ण सलाह दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जारी व्यवधानों के बीच, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया साझा की। डॉ. पनगढ़िया ने केंद्रीय बैंक से पुरज़ोर अपील की है कि वह गिरते हुए रुपये को कृत्रिम रूप से संभालने के लिए अपने बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) का इस्तेमाल बंद करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने के बजाय रुपये को पूरी तरह से बाजार की शक्तियों (Market Forces) के अनुरूप स्वतंत्र रूप से अवमूल्यन (Depreciation) की ओर बढ़ने देना चाहिए।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;जाने-माने अर्थशास्त्री ने नीति निर्माताओं को आगाह करते हुए लिखा कि 'एक डॉलर = 100 रुपये' का स्तर केवल एक मनोवैज्ञानिक आंकड़ा है और इसे किसी भी आर्थिक नीति निर्धारण का आधार नहीं बनने देना चाहिए। उनके अनुसार, 100 भी 99 या 101 की तरह महज़ एक सामान्य संख्या है। उन्होंने दो अलग-अलग परिदृश्यों के माध्यम से समझाया कि यदि कच्चे तेल की किल्लत अल्पकालिक (3 से 12 महीने) है, तो रुपया शुरुआती गिरावट के बाद तेल की कीमतें सामान्य होते ही स्वतः ही रिकवर कर लेगा। इसके अलावा, एक &amp;quot;सस्ता&amp;quot; रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारत को एक बेहद आकर्षक निवेश गंतव्य बना देगा। वहीं, यदि तेल संकट दीर्घकालिक रहता है, तो रुपये को बचाने की कोशिश में विदेशी मुद्रा भंडार को झोंकना या प्रवासियों से ऊंचे ब्याज पर जमा स्वीकार करना घाटे का सौदा साबित होगा। पनगढ़िया ने भरोसा जताया कि साल 2013 के विपरीत आज की भारतीय अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत स्थिति में है और वह रुपये के कमजोर होने से पैदा होने वाले आंशिक मुद्रास्फीति (Inflation) के दबाव को आसानी से सहन करने की क्षमता रखती है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//reserve-bank-of-india/62766</link><pubDate>5/22/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>वित्तीय क्षेत्र में बड़ा सुधार%3A आईबीसी के तहत लेनदारों ने वापस पाए ₹4.11 लाख करोड़; दिवाला शोधन प्रक्रिया में नए संशोधन लागू</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/bank7414861.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नयी दिल्ली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत के कॉर्पोरेट और बैंकिंग क्षेत्र को डूबे हुए कर्ज (NPA) से मुक्ति दिलाने में ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता (IBC) एक गेम-चेंजर साबित हुई है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा नई दिल्ली में 'दिवाला और दिवालियापन (संशोधन) अधिनियम, 2026' पर आयोजित एक उच्च स्तरीय कार्यशाला में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 तक देश में 'कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया' (CIRP) के तहत 8,800 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इन मामलों में स्वीकृत की गई विभिन्न समाधान योजनाओं के माध्यम से बैंकों और वित्तीय लेनदारों ने अब तक ₹4.11 लाख करोड़ से अधिक की डूबी हुई धनराशि को सफलतापूर्वक वापस पा लिया है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;4,000 से अधिक कंपनियों का पुनरुद्धार&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने बताया कि आईबीसी का मुख्य उद्देश्य कंपनियों को बंद करना या उनका परिसमापन करना नहीं, बल्कि उन्हें नया जीवन देना है:&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कारोबार का पुनर्गठन:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;इस अनूठे कानून के जरिए अब तक कर्ज के बोझ तले दबी 4,000 से अधिक कंपनियों को समयबद्ध समाधान, आपसी निपटान या अपीलीय प्रक्रियाओं के माध्यम से दिवालिया होने से बचाया गया है। इससे बाजार में ऋण चुकाने की एक नई स्वस्थ संस्कृति विकसित हुई है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;आधुनिक सुधार शामिल:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;सचिव ने हाल ही में किए गए नीतिगत बदलावों जैसे&amp;mdash;पूरे कंपनी समूह का संयुक्त दिवालापन (Group Insolvency), सीमा-पार दिवाला मामले (Cross-Border Insolvency) और लेनदारों द्वारा त्वरित समाधान प्रक्रिया शुरू करने के नए नियमों का जिक्र किया, जो कानूनी देरी को पूरी तरह समाप्त कर देंगे।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;पारदर्शिता और संस्थागत क्षमता पर जोर&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;भारतीय दिवाला और दिवालियापन बोर्ड (IBBI) के अध्यक्ष रवि मित्तल ने कहा कि हालिया संशोधन दिवाला ढांचे को अधिक निष्पक्ष, कुशल और भविष्य के अनुकूल (Future-Ready) बनाएंगे।&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;हितधारकों की मजबूत भागीदारी:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;इस विनियामक मंच पर कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अधिकारियों सहित प्रमुख कानूनी विशेषज्ञों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;बैंकिंग क्षेत्र को संबल:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) और इंडिया डेट रिजोल्यूशन कंपनी लिमिटेड जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी आईबीसी संशोधनों के बैंकिंग सेक्टर पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों पर चर्चा की। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य संशोधित प्रावधानों के प्रति सभी वित्तीय संस्थानों की समझ को और अधिक सुदृढ़ करना था।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//Vittiya-kshetra-mein-bada-sudhaar-IBC-ke-tahat-lendaaron-ne-wapas-paaye-₹411-lakh-crore;-divala-shodhan-prakriya-mein-naye-sanshodhan-lagu/62744</link><pubDate>5/20/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>आर्थिक कूटनीति से जमीनी हकीकत तक%3A भारत-यूरोपीय संघ एफटीए के क्रियान्वयन की बड़ी चुनौती; वाणिज्य मंत्रालय ने उद्योग जगत को किया आगाह</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/manralay1422091.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नई दिल्ली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत और 27 देशों के यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अब धरातल पर उतारने की प्रशासनिक और रणनीतिक कवायद तेज हो गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जहां इस मेगा डील को अंतिम रूप देना 'आर्थिक कूटनीति का एक दुर्लभ और ऐतिहासिक क्षण' था, वहीं अब इसके प्रावधानों को देश के छोटे-बड़े निर्यातकों, निवेशकों और रोजगार सृजकों के लिए वास्तविक मुनाफे में बदलना एक नए 'पहाड़ चढ़ने' के समान चुनौतीपूर्ण है। फिक्की (FICCI) और सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ द्वारा आयोजित एक संयुक्त राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने यह कड़ा संदेश दिया।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए ₹33 अरब डॉलर का खुला बाजार&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;जनवरी में घोषित हुए इस दूरगामी समझौते के तहत यूरोपीय संघ के बाजारों में भारत के लगभग 99.5 प्रतिशत निर्यात के लिए शून्य या बेहद कम सीमा शुल्क (Zero Tariff) का मार्ग प्रशस्त हुआ है:&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;शुल्क समाप्ति से बड़ी राहत:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत से निर्यात होने वाले वस्त्र, रेडीमेड कपड़े, चमड़ा, जूते, रत्न और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान सामानों पर वर्तमान में यूरोप में 10 से 14 प्रतिशत (कुछ विशेष श्रेणियों में 26 प्रतिशत तक) का भारी आयात शुल्क लगता है, जो अब पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत वर्तमान में यूरोपीय संघ को लगभग 33 अरब डॉलर मूल्य के श्रम-प्रधान सामानों का निर्यात करता है। भारत और यूरोपीय संघ का संयुक्त आयात-निर्यात मिलकर वैश्विक वस्तु एवं सेवा व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा कवर करता है, जो इस समझौते को दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक ब्लॉक बनाता है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;गैर-शुल्क बाधाओं और तकनीकी मानकों से निपटने की तैयारी&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक संरक्षणवाद के इस दौर में नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार को बचाए रखने के लिए यह समझौता एक मिसाल है। फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप ने बताया कि भारत के कुल वस्तु व्यापार में अकेले यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है। अब असली चुनौती देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और सेवा प्रदाताओं तक इसके ठोस लाभ पहुंचाना है। शाही एक्सपोर्ट्स के प्रबंध निदेशक हरीश आहूजा ने कहा कि भारतीय उद्योग को यूरोपीय बाजारों में सफल बनाने के लिए हमें अपने मानक बुनियादी ढांचे (Standard Infrastructure), वैश्विक प्रमाणन क्षमताओं, डिजिटल अनुपालन टूल्स और कड़े गैर-शुल्क अवरोधों (Non-Tariff Barriers) को तेजी से दूर करने के लिए एक बेहद मजबूत और आधुनिक संस्थागत तंत्र विकसित करना होगा।&lt;/p&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//aarthik-kootneeti-se-zameeni-haqeeqat-tak-bharat-european-union-fta-ke-kriyanvayan-ki-badi-chunauti/62743</link><pubDate>5/20/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>जयपुर की श्रीराम जनरल इंश्योरेंस का शानदार प्रदर्शन, चौथी तिमाही में मुनाफे और प्रीमियम आय में जबरदस्त उछाल</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/shriram7703491.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;राजस्थान की राजधानी स्थित&amp;nbsp;&lt;strong&gt;श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी (SGI)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही (Q4) में अपनी वित्तीय स्थिति को और अधिक मजबूत करते हुए रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है। बुधवार,&amp;nbsp;&lt;strong&gt;13 मई 2026&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;को कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ&amp;nbsp;&lt;strong&gt;अनिल अग्रवाल&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने वार्षिक परिणामों की घोषणा करते हुए बताया कि कंपनी की प्रीमियम आय में सालाना आधार पर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;21 प्रतिशत&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की बढ़ोतरी हुई है, जो उद्योग की औसत विकास दर (11%) से कहीं अधिक है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;प्रमुख वित्तीय आंकड़े और लाभांश&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;कंपनी का ग्रोस डायरेक्ट प्रीमियम (GDP) जनवरी-मार्च तिमाही में बढ़कर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;1,332 करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;हो गया है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मुनाफे में वृद्धि:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;कुशल परिचालन और बेहतर निवेश रणनीति के कारण कंपनी का शुद्ध मुनाफा&amp;nbsp;&lt;strong&gt;28 प्रतिशत&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की छलांग लगाकर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;167 करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;तक पहुँच गया है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पूरे वर्ष का प्रदर्शन:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;संपूर्ण वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी ने&amp;nbsp;&lt;strong&gt;601 करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;का शुद्ध लाभ अर्जित किया है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;निवेशकों को उपहार:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;बोर्ड ने इस वर्ष के लिए कुल&amp;nbsp;&lt;strong&gt;162 प्रतिशत&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;लाभांश (Dividend) देने को मंजूरी दी है, जो पिछले वर्ष के 140 प्रतिशत से अधिक है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;'फिजिटल' मॉडल और भविष्य का रोडमैप&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;अनिल अग्रवाल ने बताया कि कंपनी की सफलता का राज उसका&amp;nbsp;&lt;strong&gt;'फिजिटल' (फिजिकल + डिजिटल)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;मॉडल है।&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नेटवर्क विस्तार:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;कंपनी ने इस वर्ष 19,000 से अधिक नए वित्तीय सलाहकार जोड़े हैं, जिससे अब उनकी कुल संख्या&amp;nbsp;&lt;strong&gt;1.05 लाख&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;से ऊपर निकल गई है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लक्ष्य 2030:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;SGI की योजना 2030 तक अपने प्रीमियम को&amp;nbsp;&lt;strong&gt;10,000 करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;तक पहुँचाने और सलाहकारों की संख्या दो लाख करने की है। अगले वित्त वर्ष के लिए ₹6,000 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;

&lt;p&gt;सामाजिक सरोकारों के तहत कंपनी जयपुर में&amp;nbsp;&lt;strong&gt;₹1 करोड़&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की लागत से एक आधुनिक स्कूल का निर्माण भी कर रही है। मोटर इंश्योरेंस पोर्टफोलियो में मिली बढ़त ने SGI को निजी क्षेत्र की सबसे तेजी से उभरती जनरल इंश्योरेंस कंपनी बना दिया है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//jaipur-ki-shriram-general-insurance-ka-shandar-pradarshan/62724</link><pubDate>5/14/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>बैंकिंग सुधार की नई मांग, ऊर्जा संरक्षण और डिजिटल क्रांति के आधार पर &amp;#39;5-डे वीक&amp;#39; के लिए लामबंद हुए बैंक अधिकारी</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/bank2105411.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नयी दिल्ली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;देश के बैंकिंग क्षेत्र में कार्य संस्कृति को आधुनिक बनाने और पर्यावरण स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से&amp;nbsp;&lt;strong&gt;अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (AIBOC)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने केंद्र सरकार से एक बार फिर 'पांच दिवसीय कार्य सप्ताह' (5-Day Week) लागू करने की पुरजोर मांग की है। बुधवार,&amp;nbsp;&lt;strong&gt;13 मई 2026&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक विस्तृत पत्र में परिसंघ ने तर्क दिया है कि यह कदम न केवल कर्मचारियों के कल्याण के लिए, बल्कि ऊर्जा बचत के राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए भी अनिवार्य है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;ऊर्जा बचत और कार्बन फुटप्रिंट में कमी&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;AIBOC के महासचिव&amp;nbsp;&lt;strong&gt;रूपम रॉय&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग सेवाओं में 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम) का विकल्प सीमित है, इसलिए कार्य दिवसों में कटौती ही ऊर्जा संरक्षण का सबसे प्रभावी तरीका है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पर्यावरणीय लाभ:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;संगठन का दावा है कि सप्ताह में दो दिन बैंक शाखाएं बंद रहने से बिजली की खपत, शाखा अवसंरचना पर परिचालन भार और परिवहन के लिए उपयोग होने वाले पेट्रोल-डीजल की भारी बचत होगी। इससे बैंकिंग क्षेत्र के कुल 'कार्बन उत्सर्जन' में भी उल्लेखनीय गिरावट आएगी।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सड़क पर दबाव:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;कर्मचारियों और ग्राहकों के आवागमन में कमी आने से शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या में भी सुधार होगा।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;डिजिटल बैंकिंग: बदलता स्वरूप&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;परिसंघ ने इस बात पर जोर दिया कि आज बैंकिंग सेवाएं केवल भौतिक काउंटरों तक सीमित नहीं हैं।&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;24/7 उपलब्धता:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;strong&gt;UPI&lt;/strong&gt;, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और&amp;nbsp;&lt;strong&gt;ATM&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;जैसी सुविधाओं के कारण शनिवार को बैंक बंद रहने से ग्राहकों के वित्तीय लेनदेन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;समय समायोजन:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि ग्राहकों की सुविधा और व्यावसायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वे दैनिक कार्य घंटों में अतिरिक्त समय देने के लिए तैयार हैं।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;

&lt;p&gt;गौरतलब है कि वेतन समझौते के दौरान इस विषय पर पहले ही सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। अब बैंक यूनियनों की नजर सरकार की अंतिम स्वीकृति पर है, ताकि देश के लाखों बैंक कर्मचारियों को अन्य सार्वजनिक उपक्रमों की तरह साप्ताहिक अवकाश का लाभ मिल सके और बैंकिंग प्रणाली को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//banking-sudhaar-ki-nai-maang-urja-sanrakshan-aur-digital-kranti-ke-aadhar-par-5-day-week-ke-liye/62723</link><pubDate>5/14/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>कॉर्पोरेट प्रदर्शन - एयरटेल के मुनाफे में 39% का जबरदस्त उछाल; चौथी तिमाही में कमाए ₹7,245 करोड़</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/airtel4915571.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नयी दिल्ली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारतीय दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी&amp;nbsp;&lt;strong&gt;भारती एयरटेल&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही (Q4) में शानदार वित्तीय परिणाम पेश कर बाजार विश्लेषकों को चौंका दिया है। बुधवार,&amp;nbsp;&lt;strong&gt;13 मई 2026&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;को संपन्न हुई निदेशक मंडल की बैठक के बाद जारी आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;38.7 प्रतिशत&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;बढ़कर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;7,245 करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;पर पहुंच गया। यह वृद्धि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में एयरटेल की मजबूत बाजार पकड़ और परिचालन कुशलता को दर्शाती है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;राजस्व और परिचालन में ऐतिहासिक बढ़त&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;वित्तीय परिणामों के अनुसार, कंपनी के कुल राजस्व और परिचालन लाभ में भी दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है:&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;राजस्व वृद्धि:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;तिमाही के दौरान कुल आय&amp;nbsp;&lt;strong&gt;15.7 प्रतिशत&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;बढ़कर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;55,383 करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;हो गई।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;परिचालन लाभ (EBITDA):&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;कंपनी का परिचालन लाभ&amp;nbsp;&lt;strong&gt;16.9 फीसदी&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की बढ़त के साथ&amp;nbsp;&lt;strong&gt;32,038 करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;रहा, जो बेहतर मार्जिन प्रबंधन का प्रमाण है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लाभांश की घोषणा:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;निवेशकों को खुश करते हुए बोर्ड ने पूर्ण चुकता इक्विटी शेयरों पर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;24 रुपये प्रति शेयर&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;के लाभांश की सिफारिश की है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;ग्राहक संख्या और वार्षिक प्रदर्शन&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो एयरटेल का शुद्ध लाभ&amp;nbsp;&lt;strong&gt;53.1 प्रतिशत&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की छलांग लगाकर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;26,904 करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;के रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुँचा है।&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;घरेलू विस्तार:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत में एयरटेल के ग्राहकों का आधार&amp;nbsp;&lt;strong&gt;13.7 प्रतिशत&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;बढ़कर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;48.24 करोड़&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;हो गया है, जिसमें 5G उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या का बड़ा योगदान है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;अफ्रीका में भी कंपनी ने अपना दबदबा कायम रखा है, जहाँ ग्राहकों की संख्या&amp;nbsp;&lt;strong&gt;10.5 फीसदी&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;बढ़कर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;18.35 करोड़&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;तक पहुँच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (ARPU) में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार की रणनीति ने एयरटेल को इस मुकाम पर पहुँचाया है। इन नतीजों के बाद शेयर बाजार में भी कंपनी के प्रति निवेशकों का उत्साह बढ़ने की उम्मीद है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//corperate-pradarshan/62715</link><pubDate>5/14/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>भारत की हरित क्रांति%3A वित्त वर्ष 2025-26 में अक्षय ऊर्जा उत्पादन में 20% की ऐतिहासिक वृद्धि; कोयला आधारित बिजली में गिरावट</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/windmill5628651.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नयी दिल्ली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक युगांतकारी परिवर्तन देखा जा रहा है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर के ग्रीन फाइनेंस सेंटर (&lt;strong&gt;CEEW-GFC&lt;/strong&gt;) की नवीनतम 'मार्केट हैंडबुक' के अनुसार, वित्त वर्ष&amp;nbsp;&lt;strong&gt;2025-26&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;में भारत के अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) उत्पादन में&amp;nbsp;&lt;strong&gt;20 प्रतिशत&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की प्रभावशाली बढ़त दर्ज की गई है। इसके विपरीत, पर्यावरण के लिए चिंता का विषय रहे कोयला और लिग्नाइट आधारित बिजली उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में&amp;nbsp;&lt;strong&gt;4.3 प्रतिशत की गिरावट&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;आई है, जो देश के 'नेट जीरो' लक्ष्यों की ओर बढ़ते कदमों का प्रमाण है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;क्षमता विस्तार और सौर ऊर्जा का दबदबा&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस वित्त वर्ष में कुल&amp;nbsp;&lt;strong&gt;57.5 गीगावाट&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की शुद्ध बिजली क्षमता जोड़ी है, जिसमें से&amp;nbsp;&lt;strong&gt;95 प्रतिशत (54.6 गीगावाट)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;हिस्सा अकेले अक्षय ऊर्जा का रहा।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सौर ऊर्जा का नेतृत्व:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;नई क्षमता में सौर ऊर्जा (ग्रिड और रूफटॉप) का योगदान&amp;nbsp;&lt;strong&gt;44.6 गीगावाट&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;रहा, जबकि पवन ऊर्जा ने 6.1 गीगावाट की वृद्धि की।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कुल क्षमता:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता अब&amp;nbsp;&lt;strong&gt;533 गीगावाट&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;के मील का पत्थर पार कर चुकी है, जिसमें हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी&amp;nbsp;&lt;strong&gt;52 प्रतिशत&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;स्टोरेज तकनीक और टैरिफ में रिकॉर्ड गिरावट&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;यह वर्ष 'एनर्जी स्टोरेज' के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ है। 37 नए स्टोरेज टेंडरों के साथ, आंध्र प्रदेश के&amp;nbsp;&lt;strong&gt;APTransco&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;टेंडर ने बैटरी स्टोरेज के लिए&amp;nbsp;&lt;strong&gt;1.23 रुपये प्रति यूनिट&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;का न्यूनतम टैरिफ निर्धारित कर एक नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया है। इसके अतिरिक्त, डिस्कॉम (Discoms) की वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ है; बिजली कंपनियों का बकाया जो 2024 में लगभग 49,451 करोड़ रुपये था, वह फरवरी 2026 तक घटकर मात्र&amp;nbsp;&lt;strong&gt;4,109 करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;रह गया है।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;सीईईडब्ल्यू-जीएफसी के निदेशक&amp;nbsp;&lt;strong&gt;गगन सिद्धू&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने कहा कि जहाँ क्षमता वृद्धि उत्साहजनक है, वहीं एफडीआई (FDI) में आई 26% की गिरावट एक चुनौती है, जिससे निपटने के लिए वैश्विक निवेश को आकर्षित करना अनिवार्य होगा।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//bharat-ki-harit-kranti-vitt-varsh-2025-26-mein-akshay-urja-utpadan-mein-20-ki-aitihasik-vriddhi/62707</link><pubDate>5/13/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>नवाचार और आत्मनिर्भरता, पीयूष गोयल का उद्योग जगत को 2 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का मंत्र</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/tutt3289361.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नयी दिल्ली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री&amp;nbsp;&lt;strong&gt;पीयूष गोयल&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने भारतीय उद्योग जगत के समक्ष एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखते हुए 'निर्यात वृद्धि और आयात कटौती' को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया है। मंगलवार,&amp;nbsp;&lt;strong&gt;12 मई 2026&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;को भारतीय उद्योग परिसंघ (&lt;strong&gt;CII&lt;/strong&gt;) के वार्षिक शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था एक सुरक्षित और मजबूत स्तंभ के रूप में उभरी है। उन्होंने उद्योगों से अगले छह वर्षों के भीतर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;2 लाख करोड़ डॉलर&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;(2 Trillion Dollars) के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 15% की वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखने का आग्रह किया।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;तकनीक और नवाचार से बदलेगी विनिर्माण की सूरत&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;वाणिज्य मंत्री ने जोर दिया कि आत्मनिर्भर भारत का मार्ग केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि उद्योगों की दक्षता से प्रशस्त होगा।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;एआई और रोबोटिक्स:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;गोयल ने उद्योग जगत को&amp;nbsp;&lt;strong&gt;आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;और क्वांटम कंप्यूटिंग अपनाने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई का उपयोग कर्मचारियों की छंटनी के लिए नहीं, बल्कि उत्पादकता बढ़ाने, बर्बादी कम करने और वैश्विक बाजारों में विस्तार के लिए किया जाना चाहिए।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;क्षेत्रीय ताकत:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ऑटोमोबाइल, स्टील और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों को उन्होंने नवाचार का इंजन बताया, जो भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में शीर्ष पर ले जा सकते हैं।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का लाभ उठाने की अपील&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;गोयल ने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में 38 देशों के साथ 9 महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जो मुख्य रूप से विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ हैं।&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;वैश्विक पूरकता:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;उन्होंने तर्क दिया कि स्विट्जरलैंड, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे देश भारत के प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि पूरक हैं। इन देशों के पास उच्च तकनीक है, जबकि भारत के पास प्रतिस्पर्धी विनिर्माण लागत और अपार प्रतिभा है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;आयात बिल में कमी:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ऊर्जा दक्षता के माध्यम से भारत पहले ही प्रति वर्ष&amp;nbsp;&lt;strong&gt;10 अरब डॉलर&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की बचत कर रहा है। गोयल ने उद्योगों से स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन को बढ़ावा देने की अपील की ताकि अनावश्यक आयात पर निर्भरता कम हो सके।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;

&lt;p&gt;वाणिज्य मंत्री ने विश्वास जताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, जो 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है, देश को किसी भी वैश्विक आर्थिक झटके से बचाने में सक्षम है। अब समय आ गया है कि 'मेक इन इंडिया' को 'मेक फॉर द वर्ल्ड' के संकल्प के साथ आगे बढ़ाया जाए।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//navachar-aur-atmanirbharta-piyush-goyal-ka-udyog-jagat-ko-2-trillion-dollar-niryaat-ka-mantra/62706</link><pubDate>5/13/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>ऊर्जा क्षेत्र में अडानी का बड़ा कदम, जीवीके एनर्जी के अधिग्रहण को सीसीआई की हरी झंडी, जल विद्युत क्षेत्र में बढ़ेगा दबदबा</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/hydropower9013581.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नयी दिल्ली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत के ऊर्जा क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत करते हुए&amp;nbsp;&lt;strong&gt;अडानी पावर लिमिटेड&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने जीवीके एनर्जी (GVK Energy) के पूर्ण अधिग्रहण की दिशा में एक बड़ी नियामक सफलता हासिल की है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (&lt;strong&gt;CCI&lt;/strong&gt;) ने मंगलवार,&amp;nbsp;&lt;strong&gt;12 मई 2026&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;को अडानी पावर द्वारा जीवीके एनर्जी की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह अधिग्रहण 'कॉर्पोरेट दिवाला शोधन प्रक्रिया' (&lt;strong&gt;CIRP&lt;/strong&gt;) के तहत किया जा रहा है, जिससे दिवालियापन झेल रही जीवीके एनर्जी को नया जीवन मिलने की उम्मीद है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;पोर्टफोलियो का विस्तार और श्रीनगर जल विद्युत परियोजना&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;अडानी पावर, जो वर्तमान में देश की सबसे बड़ी निजी ताप ऊर्जा (Thermal Power) उत्पादक कंपनी है, इस सौदे के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपने पदचिह्न बढ़ाएगी।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;प्रमुख संपत्ति:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;जीवीके एनर्जी अपनी सहायक कंपनी&amp;nbsp;&lt;strong&gt;एएचपीएल (AHPL)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;के माध्यम से उत्तराखंड के श्रीनगर में&amp;nbsp;&lt;strong&gt;330 मेगावाट&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की जल विद्युत परियोजना का संचालन करती है। इस अधिग्रहण के बाद, अडानी पावर की पहुंच अब थर्मल और सौर के साथ-साथ हाइड्रो पावर सेक्टर में भी मजबूत हो जाएगी।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मौजूदा क्षमता:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;अडानी समूह पहले से ही गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडु सहित आठ राज्यों में थर्मल प्लांट और गुजरात में 40 मेगावाट का सौर प्लांट संचालित कर रहा है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;सीसीआई के अन्य महत्वपूर्ण फैसले&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;उसी दिन प्रतिस्पर्धा आयोग ने बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए कुछ अन्य विलय और अधिग्रहणों को भी स्वीकृति दी:&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;उपभोक्ता सामान क्षेत्र:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;आयोग ने&amp;nbsp;&lt;strong&gt;किम्बर्ली क्लार्क कॉर्पोरेशन&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;द्वारा&amp;nbsp;&lt;strong&gt;केन्वू इंक (Kenvue Inc.)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;के अधिग्रहण को मंजूरी दी। यह सौदा भारत के बेबी केयर, महिला स्वच्छता और स्किन केयर बाजार में बड़ी हलचल पैदा करेगा।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इंजीनियरिंग सेक्टर:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;strong&gt;त्रिवेनी अर्थ मूवर्स&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;द्वारा लॉयड्स इंजीनियरिंग वर्क्स में 7.14% हिस्सेदारी खरीदने और तीन अन्य संस्थाओं के इसमें विलय के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अडानी पावर द्वारा जीवीके एनर्जी का अधिग्रहण न केवल फंसे हुए ऋण (Stressed Assets) के समाधान में मदद करेगा, बल्कि यह भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//urja-kshetra-mein-adani-ka-bada-kadam-gvk-energy-ke-adhigrahan-ko-cci-ki-hari-jhandi/62705</link><pubDate>5/13/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>पूर्वी भारत में वित्तीय स्वायत्तता की नई लहर%3A बंधन लाइफ की महिला पॉलिसीधारकों की संख्या में भारी उछाल</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/bandhan8141811.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नयी दिल्ली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;पूर्वी भारत की महिलाओं के बीच वित्तीय सुरक्षा और निवेश के प्रति जागरूकता की एक नई तस्वीर उभर कर सामने आई है। निजी क्षेत्र की प्रमुख जीवन बीमा कंपनी, बंधन लाइफ इंश्योरेंस ने सोमवार को अपने नवीनतम आंकड़े साझा करते हुए बताया कि इस क्षेत्र में महिला पॉलिसीधारकों की भागीदारी पिछले दो वर्षों में आश्चर्यजनक रूप से तीन गुना बढ़ गई है। वित्त वर्ष 2023-24 में जहां यह आंकड़ा मात्र 12 प्रतिशत था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 तक यह बढ़कर 35 प्रतिशत के प्रभावशाली स्तर पर पहुंच गया है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;पश्चिम बंगाल और बिहार अग्रणी&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल महिलाओं के बीमा कवरेज के मामले में सबसे आगे है, जिसकी कुल क्षेत्रीय महिला पॉलिसीधारकों में हिस्सेदारी 42.84 प्रतिशत है। इसके बाद बिहार (21.46%), ओडिशा (10.67%), झारखंड (9.31%) और असम (8.54%) का स्थान आता है। यह वृद्धि दर्शाती है कि क्षेत्र की महिलाएं अब भविष्य की अनिश्चितताओं के प्रति पहले से कहीं अधिक सजग हैं।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;बदलती प्रोफाइल: आत्मनिर्भरता पर जोर&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;बंधन लाइफ के एमडी और सीईओ सतीशेश्वर बी. ने इस बदलाव पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि महिलाएं अब न केवल परिवार की देखभाल करने वाली, बल्कि मुख्य वित्तीय स्तंभ के रूप में भी उभर रही हैं। रिपोर्ट में एक दिलचस्प रुझान यह भी देखा गया है कि 46 से 65 वर्ष की परिपक्व आयु वर्ग की महिलाओं में बीमा खरीदने की रुचि बढ़ी है। इसके अलावा, गैर-वेतनभोगी और स्व-रोज़गार वाली महिलाओं की हिस्सेदारी अब कुल महिला पॉलिसीधारकों में 85 प्रतिशत हो गई है, जो वित्त वर्ष 2022-23 की तुलना में लगभग दोगुनी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह स्पष्ट है कि महिलाएं अब अपने वित्तीय निर्णय स्वयं ले रही हैं। बंधन लाइफ का मानना है कि बीमा अब केवल एक बचत का साधन नहीं, बल्कि लंबी अवधि की वित्तीय योजना और सुरक्षा का अनिवार्य हिस्सा बन गया है। पूर्वी भारत में महिलाओं का यह बढ़ता रुझान देश की समग्र आर्थिक स्वायत्तता और वित्तीय साक्षरता के लिए एक सकारात्मक संकेत है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//poorvi-bharat-mein-financial-azaadi-ki-nayi-lehar-bandhan-life-ki-mahila-policyholders-ki-sankhya/62702</link><pubDate>5/12/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>भारतीय विमानन क्षेत्र में बड़ी छलांग, एम्ब्रेयर और भारत फोर्ज के बीच &amp;#39;फोर्ज्ड रॉ मटेरियल&amp;#39; के लिए ऐतिहासिक समझौता</title><Image>https://firozabadvocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/embraer6866771.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नयी दिल्ली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत के विमानन और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर स्थापित करते हुए, ब्राजील की दिग्गज विमान निर्माता कंपनी&amp;nbsp;&lt;strong&gt;एम्ब्रेयर (Embraer)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने&amp;nbsp;&lt;strong&gt;भारत फोर्ज लिमिटेड (Bharat Forge)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इस करार के तहत भारत फोर्ज एम्ब्रेयर के विमानों के लिए महत्वपूर्ण 'फोर्ज्ड कच्चे माल' (Forged Raw Materials) की आपूर्ति करेगा। यह पहली बार है जब एम्ब्रेयर ने किसी भारतीय कंपनी को अपने वैश्विक फोर्ज्ड उत्पादों की सप्लाई चेन का हिस्सा बनाया है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत का बढ़ता कद&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;एम्ब्रेयर की यह पहल अपनी वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक विविधतापूर्ण और प्रतिस्पर्धी बनाने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी के कार्यकारी उपाध्यक्ष रॉबर्ट शेव्स ने इस समझौते पर कहा कि भारत विमानन आपूर्ति श्रृंखला के मामले में अपार संभावनाओं वाला देश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अनुबंध न केवल एम्ब्रेयर की विनिर्माण क्षमता को मजबूती देगा, बल्कि भारतीय विमानन पारिस्थितिकी तंत्र (Aviation Ecosystem) के प्रति उनके दीर्घकालिक विश्वास को भी प्रदर्शित करता है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;भारत फोर्ज की तकनीकी दक्षता का प्रमाण&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;भारत फोर्ज के लिए यह समझौता उसकी वैश्विक पहचान और तकनीकी श्रेष्ठता का प्रमाण है। कंपनी के उपाध्यक्ष अमित बी. कल्याणी ने इसे गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि एम्ब्रेयर का पहला भारतीय आपूर्तिकर्ता बनना विमानन क्षेत्र में उनकी विकसित क्षमताओं को दर्शाता है। यह सहयोग भारत फोर्ज को उच्च-स्तरीय विमान कलपुर्जों के उत्पादन के लिए अपनी क्षमताओं को बड़े पैमाने पर विस्तार देने में मदद करेगा।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;औद्योगिक विकास को मिलेगी गति&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता 'मेक इन इंडिया' और वैश्विक आपूर्ति विविधीकरण (Supply Chain Diversification) के दौर में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल भारत में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि उन्नत फोर्जिंग प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में देश की पकड़ और मजबूत होगी। आने वाले वर्षों में दोनों कंपनियों के बीच यह रिश्ता और प्रगाढ़ होने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले विमानों का निर्माण संभव हो सकेगा।&lt;/p&gt;
</description><link>https://firozabadvocals.com//bharatiya-aviation-kshetra-mein-badi-chhalang-embraer-aur-bharat-forge-ke-beech-forged-raw-material/62698</link><pubDate>5/12/2026 12:00:00 AM</pubDate></item></channel></rss>